छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एन.टी.पी.सी. सीपत संयंत्र का विकास
कु. सत्यवती कौशिक1 एवं चैतन्य नन्द2
1शोध छात्रा (पी.एच-डी), डाॅ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, कोटा, बिलासपुर (छ.ग.)
2विभागाध्यक्ष (भूगोल) विभाग, शास. जा.दे. नवीन कन्या महाविद्यालय, जांजगीर (छ.ग.)
सारांश
छत्तीसगढ़ राज्य का एक महत्वपूर्ण जिला बिलासपुर है। यह छ.ग. राज्य के रायपुर जिला के बाद दूसरा सबसे विकसित जिला है। यह मध्य पूर्वी भारत में स्थित है।बिलासपुर जिला छ.ग. की पश्चिमी भाग मेें स्थित है। एन.टी.पी.सी. सीपत संयंत्र बिलासपुर जिले के तहसील मस्तुरी में ग्राम पंचायत सीपत में विस्तृत है।सुपर क्रिटीकल तकनीक वाली यह देश की पहली परियोजना है। इसकी उत्पादन क्षमता 2980 मेगावाटहै। औधोगिक क्षेत्र एन.टी.पी.सी. सीपतसंयंत्र का साईज 2207ष्52.36श् छ 82017ष्30.59श्म् है। सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन का नामकरण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव गांधी सुपर थर्मल पावर स्टेशन रखा है।
प्रस्तावना
वर्तमान औद्योेगिक युग में शक्ति के संसाधन किसी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का सूचक तथा आधार स्तंभ है। राज्य़ में विद्युत शक्ति का उत्पादन बडेे ़पैमान ेपर किया जाता है। कोरबा छत्तीसगढ़ ही नही ंअपितु भारत का सब से बड़ा ताप विद्युत केन्द्र है। सुपर थर्मल पावर स्टेशन एन.टी.पी.सी. सीपत संयंत्र का शिलान्यास 28 जनवरी सन् 2002 को दसवी पंचवर्षीय योजना में किया गया था। एन.टी.पी.सी. सीपत में उत्पादन ग्यारहवी पंचवर्षीय योजनामें 6 मई 2008 को कुल 1980 मेगावट विद्युत उत्पादन से किया गया। बारहवी पंचवर्षीय योजना के दौरान 19.09.2013 को बिलासपुर से 18 कि.मी दूर के सीपत में एन.टी.पी.सी. सीपत सुपर थर्मल पावर प्लांट के 2980 डण्ॅण् का लोकार्पण कर देश को समर्पित किया। जिसका नाम करण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के नाम पर ‘‘राजीव गांधी सुपर थर्मल पावर स्टेशन’’ कया गया है। एन.टी.पी.सी. सीपत की स्थापना से इस क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्वि हुई है ।
अध्ययन क्षेत्र
“ धान का कटोरा ” के नाम से प्रचलित छत्तीसगढ़ भारत का 26 वां राज्य है । एन.टी.पी.सी संयंत्र राज्य के बिलासपुर जिले के मस्तुरी तहसील के सीपत नामक स्थान पर स्थित है । तहसील की अक्षांशीय विस्तार 22 अंश 21 मिनट से 22 अंश 45 मिनट उत्तरी अंक्षाश तथा 82 अंश 05 मिनट पूर्व से 82 अंश 30 मिनट पूर्वी देशान्तर के मध्य 739.2 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है । 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 199377 व्यक्ति है । मस्तुरी तहसील में एक विकासखंड एवं दो राजस्व मंडल है । तहसील में कुल 106 ग्राम पंचायत है ।
उदेश्य
प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उदेश्य एन.टी.पी.सी .संयंत्र के विकास का अध्ययन करना है।
1. अध्ययन प्रविधि (डमजीवकवसवहल)
प्रस्तुत शोध पत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ो पर आधारित है। द्वितीयक आंकड़ो के लिए प्रकाशित एवं अप्रकाशित अभिलेख, जिला जनगणना पुस्तिका 2011 के आंकड़े, जिला सांख्यिकी पुस्तिका, समाचार पत्र, एन.टी.पी.सी. सीपत की पत्रिका से प्राप्त जानकारी का प्रयोग किया गया है।
2. स्थिति विस्तार एवं प्रशासकीय सरंचना
बिलासपुर जिले में मस्तुरी तहसील छत्तीसगढ़ राज्य उ.प. में 22021ष्उत्तर से 220 45ष् उत्तरी अक्षाश तथा 820 05ष्पूर्व से 82030ष्पूर्वी देशांतर के बीच 739.2 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है। इस तहसील की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 199377 है। जिनमें पुरूषों की संख्या 100337, स्त्री की सख्यां 99040 को आबद्ध करता है। तहसील के पश्चिमी भाग मंे बिलासपुर जिले का बिल्हा उत्तरी भाग में कोरबा जिले का पाली, उत्त्रीपूर्वी भाग में जांजगीर जिले का बलौदा तथा पूर्वी भाग में अकलतरा और पामगढ़ विकासखंड स्थित है। तहसील का दक्षिणी भाग तीन नदियों शिवनाथ, अरपा और लीलागर से निर्धारित है।
मस्तुरी तहसील में एक विकासखण्ड (मस्तुरी) दो राजस्व निरीक्षक मण्डल (सीपत तथा मस्तरी) तथा 29 पटवारी हल्का (सीपत में14 तथा मस्तुरी मंे 15 हल्का नंबर है।)172 कुल ग्राम जिसमें 170 आबाद ग्राम व 2 वीरान ग्राम है। इस तहसील में कुल 106 ग्राम पंचायत (सीपत में 52 तथा मस्तुरी में 54 ग्राम पंचायत है।)
3. इतिहास
एन.टी.पी.सी. सीपत परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के तहसील मस्तुरी मंे स्थित है। इसका इतिहास ऐतिहासिक है। मस्तुरी तहसील में मल्हार में प्रसिद्ध ब्लैक ग्रेनाइट की डिडनेश्वरी की मूर्ति स्थित है। चीनी यात्री व्हेन सांग भी यहाँ की धार्मिक यात्रा कर चुके है। पांचवी शताब्दी के अंत म दक्षिण कौशल में एक नए राज्य की स्थापना हुई थी जिनकी राजधानी शरभपुर थी। इस राजवंश का नाम इसके संस्थापक शरभ के नाम पर था। मल्हार धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व का गांव है। यहाँ खुदाई से सिक्के, मूर्तियां एवं प्राचीन महल का अवशेष प्राप्त हुए है। पातालेश्वर महादेव केदार मंदिर, देउरी मंदिर, पृथ्वी माता की मूर्ति, हरि-हर मूर्ति जो विश्व की प्राचीनतम् मूर्तियाँ है।
4. विस्थापित क्षेत्र
विस्थापित का तात्पर्य भू से बेदखल करना है। एन.टी.पी.सी. सीपत संयंत्र से प्रभावित होने वाले गांव मे 25 गांव की जमीन (रेल्वेक्षेत्र) से प्रभावित है स्थापित है। विस्थापित क्षेत्र में 8 ग्राम है जिनकी जनसंख्या और भूमि प्रभावित है ये निम्न ग्राम है- देवरी, कौड़िया, जांजी, सीपत ,रांक, रलिया, दर्राभाठा, हरदाडीह आदि। सीपत संयंत्र से प्रभावित होने वाले परिवारों की संख्या 3106 है। सीपत संयंत्र के लिए किसानों ने अपनी 4300 एकड़ जमीन दी हैं।
जल स्त्रोतः-हसदेव नदी सेे जलपूर्ति की जाती है।
कोयला खानः- सुपर थर्मल पावर प्लांट सीपत को 2980 मेगा वाट बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन 43 हजार 700 टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। एन.टी.पी.सी. सीपत को कोयले की आपूर्ति एस.ई.सी.एल. की दीपका खदान से की जाती है । दीपका खदान से सीपत संयंत्र को प्रतिदिन 15 रैक कोयले की आपूर्ति रेल तथा शेष कोयला सड़क परिवहन के माध्यम से किया जाता है।
एन टी पी सी सीपत संयंत्र की लागत 13 हजार करोड़ रूपये है।
REFERENCES:
1. त्रिपाठीके एवं चन्द्राकर पी (2001): छत्तीसगढ़ का भूगोल, शारदा प्रकाशन, बिलासपुर
2. त्रिपाठी के. एवं चन्द्राकर पी (2012)ः छत्तीसगढ़ एटलस, एस शारदा
पब्लिकेशन, बिलासपुर
4. जिला सांख्यिकी पुस्तिका, बिलासपुर (2011)
5. जनपदीय सामाजार्थिक समंक विवरणिका बिलासपुर (2011)
6. छत्तीसगढ़ प्राथमिक जनगणना सार, 2001, 2011
7. एन.टी.पी.सी. सीपत की समाचार पत्रिका
Received on 08.09.2014 Modified on 22.09.2014
Accepted on 26.09.2014 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 2(3): July- Sept. 2014; Page 183-185